Mustard Oil Ban : सरसों का तेल हर रसोई की जरूरत है। सरसों के तेल के बिना खाने की कल्पना करना भी मुश्किल है। परंतु, सरसों का तेल सरकार की तरफ से बैन भी किया गया है। आधिकारिक तौर पर यहां सरसों का तेल खाद्य सामग्री के लिए प्रयोग नहीं हो सकता। चलिए जानते हैं, इसके पीछे क्या है कारण-
सरसों के तेल के बारे में आयुर्वेद की राय
आयुर्वेद में सरसों के तेल (sarso tel) को उत्तम खाद्य सामग्रियों में माना गया है। इसके प्रयोग को लाभकारी बताया जाता है। सरसों के तेल की तासीर गर्म होती है। इसका इस्तेमान दवा के रूप में भी होता है। यह हानिकारक बैक्टीरिया का पनपने से रोकता है। सरसों के तेल के अंदर एंटीऑक्सीडेंट, एंटीबायोटिक और एंटी-फंगल गुण पाए जाते हैं। परंतु, हर अध्ययन सरसों के तेल के बारे में एक सी राय नहीं रखता है। सरसों का तेल बैन भी है।
इस वजह से लगाया गया है सरसों तेल पर बैन
स्टडी के अनुसार सरसों के तेल में इरुसिक एसिड बहुत अधिक होता है। इसको सेहत के लिए अच्छा नहीं माना जाता। इस एसिड की मात्रा अधिक होने के आधार पर सरसों तेल को बैन किया गया है। शोध में यह बात सामने आ चुकी है। बता दें कि इरुसिक एसिड एक मोनोअनसैचुरेटेड ओमेगा-9 फैटी एसिड होता है। यह सरसों ही नहीं, कुछ बाकी तेलों में भी पाया जाता है। इसकी चूहों और कुछ जानवरों पर स्टडी की गई। इसके बाद इसमें अधिक मात्रा होने के कारण पाया गया कि इससे हृदय रोग का जोखिम बढ़ता है। साथ में दिमाग की कुछ बीमारियां, मोटापा, फैटी लिवर और पेट से जुड़ी बीमारी होने का खतरा रहता है।
इन देशों में लगी है रोक
सरसों के तेल को हर जगह बैन नहीं किया गया है। इसपर यह बैन अमेरिका, कनाडा और यूरोपीय देशों में है। अनप्रोसेस्ड सरसों के तेल को खाने में प्रयोग करने पर बैन है। यहां तक कि इन देशों में सरसों तेल के पैकेट पर लिखा रहता है कि फॉर एक्सटर्नल यूज ओनली। यानी कि तेल का इस्तेमाल खाने में नहीं किया जा सकता। इसको त्वचा, बालों की देखभाल आदि के लिए प्रयोग किया जा सकता है। अमेरिका की सरकार ने बताया कि सरसों तेल को लेकर अमेरिका के खाद्य और औषधि प्रशासन की तरफ से आपत्तियां लगाई गई हैं।
क्या भारत में भी है बैन
सरसों तेल भारत की हर रसोई का अभिन्न अंग है। यहां सरसों तेल का इस्तेमाल रोजाना पकाया जाने वाले भोजन में होता है। भारत में यह बैन नहीं है। बता दें कि इरुसिक एसिड के नुकसानदेह होने की बात अब तक सिर्फ दूसरे जीवों पर की गई रिसर्च में सामने आई है। देश में कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इरुसिक एसिड का इंसान पर क्या-क्या असर पड़ता है, इसे पक्के तौर पर जानने के लिए और रिसर्च की जरूरत है। दूसरी तरफ भारत में इरुसिक एसिड की मात्रा कम वाली भी सरसों की किस्में हैं। इन किस्मों में ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड का अनुपात सही होता है। वहीं, यहां की रैसिपी भी दूसरे देशों से अलग है।
बाजार की लड़ाई होने की भी आशंका
सरसों देश में बहुत पुरानी इस्तेमाल की वस्तु है। वहीं, पश्चिमी देशों में बैन संदेह जाहिर करता है कि कहीं यह बाजार पर कब्जा जमाने की लड़ाई तो नहीं है। इसपर कुछ पक्का नहीं कहा जा सकता है। कुछ विदेशी कंपनियां भारत में प्रचलित सरसों के तेल की जगह पर अपने मुनाफे के लिए रिफाइंड और कुछ दूसरे तेलों को बाजार में बेचती है। इस वजह से भी इसको संदेह की नजर से देखा जाता है। हालांकि सरसों तेल पर हम कुछ सीमा कर सकते हैं, क्योंकि अति हर चीज की बुरी होती है।