Guar Rate : ग्वार में 2000 की बड़ी गिरावट, आगे क्या रहेंगे रेट

Guar Rate – ग्वार उत्पाक किसानों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। दरअसल, ग्वार में तेजी के बाद अब बड़ी गिरावट आई है। बाजार में इस समय ग्वार की कीमतें 2 हजार रुपये तक डाउन आ गई है। ग्वार के रेट पहले से ही काफी मंदे चले रहे थे। अब और गिरावट आने से किसानों को बड़ा झटका लगा है। इस बीच बाजार जानकारों ने बताया है कि आगे ग्वार के रेट कहां तक जा सकते हैं। चलिए जानते हैं –

अचानक टूटे ग्वार के रेट –

दुनिया में सबसे ज्यादा ग्वार राजस्थान राज्य में होता है और इसका जोधपुर सबसे बड़ा प्रोसेसिंग हब माना जाता है। यहां से ग्वार का गम निकाला जाता है जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल और गैस उद्योग में भेजा जाता है। दरअसल, मौजूदा समय में अमेरिका और खाड़ी देशों के बीच बढ़ रहे तनाव की वजह से इसकी सप्लाई चैन प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर ग्वार गम की मांग और कीमतों (Guar Rate) पर देखने को मिल रहा है। व्यापारी ने जानकारी देते हुए बताया है कि मांग में कमी के चलते ग्वार गम में लगभग 2 हजार रुपये क्विंटल की गिरावट आई है।

इस वजह से ग्वार में बड़ी गिरावट –

अमरीका, इजरायल और ईरान के बीच लगातार बढ़ रहे तनाव से देशभर की मंडियों (Mandi Bhav) पर सीधा प्रभाव पड़ा है। राजस्थान के कृषि निर्यात तो इससे बुरी तरह प्रभावित हुई है। नागौर और जोधपुर की मंडियों में ग्वार की कीमतें अचानक डाउन आ गई हैं। नागौर का प्रसिद्ध जीरा, जोधपुर का ग्वार गम और मेड़ता की मैथी जैसे प्रमुख उत्पाद, जिनका भारी मात्रा में विदेशों में निर्यात किया जाता है, उनकी मांग में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इससे मंडियों में ग्वार के साथ-साथ जीरा और मैथी की फसलों के दाम भी तेजी से नीचे गिरे हैं। राजस्थान में ग्वार सबसे ज्यादा होता है। निर्यात सप्लाई बाधित होने से नागौर की मंडियों में कई फसलों की कीमतें डाउन आ गई हैं।

पिछले काफी समय से खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध की वजह से समुद्री मार्ग असुरक्षित हो गए हैं, जिससे निर्यात नहीं हो पा रहा है और कई फसलें जो सबसे ज्यादा निर्यात की जाती हैं वह बंदरगाहों पर ही अटक हुई हैं। ऐसे में स्थानीय मंडियों में खरीद पर भारी असर पड़ा है।

किसानों की उम्मीदरों पर फिरा पानी –

किसानों ने पिछले सीजन में इस उम्मीद से ग्वार (Guar Mandi Rate) का खूब स्टॉक किया था कि अगले साल तक कीमतों में जबरदस्त तेजी आएगी। लेकिन यहां तो कहानी ही उल्टी पड़ गई है। खाड़ी देशों में तनाव बढ़ने से कीमतें गिरती ही जा रही हैं। किसानों की उम्मीदों पर पूरी तरह से पानी फिर गया है। बाजार जानकारों का कहना है कि अगर ईरान, अमेरिका और ईजराइल के बीच संघर्ष और बढ़ता है तो ग्वार की कीमतें और भी गिर सकती हैं।

अब भूल जाओ 32 हजार रुपये क्विंटल का सपना –

सोने की तरह ग्वार की कीमतें भी पहले इतिहास रच चुकी हैं। साल 2012 में ग्वार के दाम अचानक 32,000 रुपये प्रति क्विंटल पर जा बैठे थे। उस समय अमेरिका में मांग बढ़ने से ग्वार की कीमतों (guar bhav) में तूफानी तेजी देखने को मिली। उस समय ग्वार में आई तेजी का लाभ ज्यादा किसान नहीं उठा पाए थे, क्योंकि बहुत से किसानों ने ग्वार का स्टॉक किया उनका मानना था कि आने वाले समय में रेट और ज्यादा बढ़ेंगे। लेकिन इसके बाद ग्वार ने ऐसा गियर सिफ्ट किया कि यह 4 से 5 हजार रुपये क्विंटल पर आकर रूका। मौजूदा समय में ग्वार में और गिरावट आने से यह तो साफ हो गया है कि अब 32 हजार रुपये क्विंटल का सपना पूरा होना नामुमकिन है।

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