Gold Silver Rate : 7 दिन में कितने सस्ते हुए सोना और चांदी, जानें क्या रह गई कीमत

Gold Silver Rate : वायदा बाजार में शुक्रवार को सोने-चांदी की कीमतों में ज्यादा बदलाव देखने को नहीं मिला। सोने और चांदी में नरमाई देखने को मिली। इस पर एक्सपर्टस का कहना है कि वैश्विक स्तर पर चल रही अनिश्चितओं का दौर चल रहा है जिसका असर वायदा बाजार पर पड़ रहा है। उनका मानना है कि अगर अंतराष्ट्रीय स्तर पर हालात ऐसे ही रहे तो वायदा बाजार पर दबाव रहेगा। जानिए पश्चिमी देशों में चल रहे तनाव के कारण वायदा बाजार पर क्या असर देखने को मिला

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी

विश्व स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ गई है। ब्रेंट क्रूड ऑयल करीब 106 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है, जबकि डब्लयूटीएफ क्रूड ऑयल भी उछलकर 96.92 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। कई दिनों बाद क्रूड लगातार 100 डॉलर के ऊपर बना हुआ है। 17 अप्रैल को ईरान द्वारा स्टेट ऑफ हॉर्मुज खोलने की घोषणा के बाद कीमतों में गिरावट आई थी। मगर दोबारा ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड में 17 प्रतिशत तेजी दर्ज की गई थी।

रोजमर्रा की वस्तुएं होगी महंगी

विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर रोजमर्रा की वस्तुओं पर पड़ सकता है। पेट्रोल-डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा की चीजों की लागत बढ़ेगी। जिससे रोजमर्रा का सामान महंगा होगा। यानी आम आदमी के जन-जीवन पर इसका असर देखने को मिलेगा।सोने में में उतार-चढ़ाव

सोने में में उतार-चढ़ाव

वैश्विक ऑनलाइन फॉरेक्स के सीनियर मार्केट एनालिस्ट केल्विन वोंग का मानना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रहेगी तब तक सोना दबाव में रहेगा। फिलहाल सोने की कीमतें सीमित दायरे में घूम रही हैं और मूविंग एवरेज के बीच कारोबार कर रही हैं। इस हफ्ते सोने में करीब 3.5 फीसदी गिरावट देखने को मिली। वहीं 24 अप्रैल को स्पॉट गोल्ड 0.7 प्रतिशत से गिरकर 4,661.33 डॉलर प्रति औंस था।

डॉलर लगातार अपनी मजबूती बना रहा

इस सप्ताह अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में करीब 0.8 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि डॉलर मजबूत होने से दूसरी करेंसी में सोना खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे इसकी मांग घटती है। ईरान और अमेरिका के बढ़ते तनाव के बीच डॉलर की मजबूती ने भी सोने के प्रभाव को कम किया है।

होर्मुज पर टिकी बाजार की नजरें


मध्यपूर्व में बढ़ते तनाव और स्टेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर हालात बाजार के लिए अहम बने हुए हैं। यहां किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर वैश्विक तेल सप्लाई पर पड़ सकता है, जिससे कीमतों में और उछाल आ सकता है। वहीं साथ में ये जानकारी भी मिली है कि महंगाई को काबू में करने के लिए केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं।

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