Property Down : प्रोपर्टी की मार्केट भार मंदी देखने को मिल रही है। हालात ये है कि जो कीमत मकानों की 2005 में थी वो आज के समय में बनी हुई है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं कि क्या है यह पूरा मामला।
पिछले चार साल से मंदी झेल रही प्रोपर्टी मार्केट
पिछले 4 सालों से चीन की प्रोपर्टी मार्केट लगातार मंदी का दंश झेल रही है। जिससे रिपोर्ट में यह सामने आया कि चीन में 70 शहरों में घरों की कीमतें बिल्कुल डाउन आ गई है। जिससे हालात ये हो गए है कि चीन में जो मकान 2005 में बेचे जाते थे वो आज उसी कीमत पर बेचे जा रहे हैं।
भारत पर क्या असर पड़ेगा
चीन की प्रोपर्टी मार्केट के मंदी से आने का मतलब है आम लोगों की बचत और संपत्ति का सीधे तौर पर कम होना। वहीं चीन की जीडीपी में रियल स्टेट हिस्सा 25 प्रतिशत था जो अब कम हो गया है। मार्केट डाउन जाने की बाते सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। साथ ही सोशल मीडिया पर लोग ये भी कमेंट कर रहे हैं कि इससे भारत पर क्या असर पड़ेगा।
स्लो-मोशन कोलैप्स माना जा रहा
बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स के आंकड़ों के अनुसार चाइना का रिहायशी प्रॉपर्टी प्राइस इंडेक्स 2025 की चौथी तिमाही में गिरकर 86.79 पर आ गया। इससे पहले 2021 में यह 113 था जो अब तक का सबसे ज्यादा प्रॉपर्टी प्राइस इंडेक्स था। पिछले चार सालों में एक चौथई वैल्यू ख्त्म हो गई। जिससे विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट एकदम से नहीं आई बल्कि स्लो-मोशन कोलैप्स यानी धीरे-धीरे मार्केट नीचे जा रही है।
डेवलपर्स को लगा तगड़ा झटका
चीन के रियल एस्टेट संकट का सबसे बड़ा झटका वहां के बड़े डेवलपर्स को लगा है। Evergrande पर 300 अरब डॉलर से ज्यादा का कर्ज चढ़ गया और अगस्त 2025 में यह हांगकांग स्टॉक एक्सचेंज से डीलिस्ट हो गया।
भारत की प्रोपर्टी मार्केट पर क्या असर पड़ेगा
सोशल मीडिया पर लगातार यह सवाल जारी है कि क्या भारत की मार्केट के चीन जैसे हालात बनेंगे। इस पर विशेषज्ञों का कहना है कि अभी भारत की प्रोपर्टी मार्केट में ऐसे कोई सकेंत नहीं मिल रहे। प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी की एक फर्म की रिपोर्ट के मुताबिक भारत के हाउसिंग मार्केट में फिलहाल स्थिरता के साथ 4 प्रतिशत से 10 प्रतिशत तक सालाना बढ़त देखी जा रही है।
भारत की प्रोप्रटी मार्केट अभी मजबूत
रिपोर्ट के अनुसार, भारत का रियल एस्टेट बाजार मजबूत स्थिति में है। अनसोल्ड इन्वेंट्री का स्तर भी कंट्रोल में है, जो करीब 15 महीनों के आसपास बना हुआ है। क्योंकि भारत और चीन के हाउसिंग मार्केट की बुनियाद अलग है। भारत में अब भी घरों की डिमांड ज्यादा है और बड़ी आबादी के पास पक्का मकान नहीं है। यही वजह है कि यहां कीमतों में बड़ी गिरावट की आशंका फिलहाल नहीं दिखती