Haryana के इन 4 जिलों में नए प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी, 94 गांवों के किसानों को होगा लाभ


Haryana News :
हरियाणा में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए एसएलएससी ने कई परियोजनाओं को मंजूरी दी है। जिसका सीधा लाभ किसानों को मिलने वाला है। खबर में विस्तार से जानिए इस योजना के बारे में ।

94 गांवों के किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

राज्य स्तरीय स्वीकृति समिति यानी एसएलएससी ने मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में सूक्ष्म सिंचाई एवं कमान एरिया विकास प्राधिकरण (मिकाडा) के अंतर्गत 4 सामुदायिक सौर ऊर्जा आधारित एकीकृत सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी दी है। प्रेदश के भिवानी, झज्जर, कुरुक्षेत्र और महेंद्रगढ़ जिलों के 20 ब्लॉकों में स्थित 61 नहरी आऊटलेट्स पर ये परियोजना लागू की जानी है। जानकारी के अनुसार इस परियोजना को 2029 तक पूरा किया जाएगा। इस परियोजना का 94 गांवों के 8926 किसानों को सीधा लाभ होगा।

94 गांवों में 402.41 करोड़ रुपये की आएगी लागत

प्रदेश के भिवानी जिले के लिए 95.78 करोड़, झज्जर के लिए 114.68 करोड़, कुरुक्षेत्र के लिए 77.17 करोड़ तथा महेंद्रगढ़ के लिए 114.78 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं। नहरी क्षेत्रों में ड्रिप और स्प्रिंकलर प्रणाली को बढ़ावा दिया जाएगा।

घटते भूजल स्तर पर होगी कड़ी निगरानी

जल आपूर्ति और मांग के संतुलित प्रबंधन को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में जलवायु परिवर्तन और गिरते भूजल स्तर से निपटने के लिए विभागों को समयबद्ध क्रियान्वयन, कड़ी निगरानी और बेहतर समन्वय के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि योजनाओं का लाभ तय समय में किसानों तक पहुंचे, इसके लिए अधिकारियों को फिल्ड में उतरना होगा।

16 सुधार एजेंडों की दी मंजूरी

बैठक में सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई प्रणाली को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। समिति ने पीडीएमसी दिशा-निर्देश 2025 के तहत 16 बड़े सुधार एजेंडों को मंजूरी दी। 165 आवेदनों की जांच के बाद 147 निर्माताओं और आपूर्तिकर्ताओं को 2025-26 से 2029-30 तक के लिए पंजीकरण योग्य पाया गया। विक्रेताओं ने मानकों के अनुसार दरें तय करने पर सहमति जताई, जिससे किसानों को कीमतों के उतार-चढ़ाव से राहत मिलेगी।

बिलों का होगा डिजिटल सत्यापन

योजना का लाभ लेने वाले को DBT और इन-काइंड मॉडल पर जारी रखा जाएगा। किसान अपनी पसंद के आपूर्तिकर्ता का चयन कर सकेंगे। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए मिकाडा पोर्टल को जीएसटी पोर्टल से जोड़ा जाएगा, जिससे बिलों का डिजिटल सत्यापन संभव होगा और फर्जी बिलिंग पर रोक लगेगी।

20 प्रतिशत की होगी स्वतंत्र जांच

गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए हर साल कम से कम 20 प्रतिशत परियोजनाओं की स्वतंत्र निगरानी की जाएगी। लैब रिपोर्ट की राज्य स्तर पर जांच होगी और नियम उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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