Haryana News : हरियाणा सरकार का बड़ा ऐलान, अब नई IMT में होगी किसानों की बराबर की भागीदारी

Haryana News : प्रदेश सरकार द्वारा अनेकों विकास परियोजनाओं शुरू की जा चुकी है। जो प्रदेश को एक नई दिशा देने का काम करती है। इसी कड़ी में प्रदेश सरकार द्वारा विकास परियोजनाओं खासकर नई औद्योगिक टाउनशिप (आइएमटी) विकसित करने के लिए लैंड पूलिंग पालिसी में बड़ा बदलाव किया है। इस पॉलिसी में बदलाव करने से किसको फायदा मिलने वाला है जानते हैं खबर में।

50 प्रतिशत हिस्सा किसानों को मिलेगा

इस परियोजना के अंदर जितनी नई आइएमटी बनेगी अब उनमें 50 प्रतिशत किसानों को मिलेगा। यानी इस पॉलिसी के लागू होने से किसान जमीन के बदले मिलने वाले मुआवजे पर निर्भर नहीं रहेंगे। बल्कि उन्हें आइएमटी बनने के बाद उसमें से 50 प्रतिशत हिस्सा भी मिलेगा। उच्च स्तरीय बैठक में लैंड पूलिंग पालिसी के नये प्रारूप को मंजूरी प्रदान की गई।
इस बैठक में सीएम नायब सैनी और उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह, सीएम के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर और प्रधान सचिव अरुण गुप्ता मौजूद रहे।

आसानी से मिल सकेगी जमीन

बैठक के बाद अधिकारियों की प्रतिक्रिया मिलने के बाद इस प्रोजेक्ट पर सहमती बनी है। उद्योग विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था से न सिर्फ जमीन आसानी से उपलब्ध होगी, बल्कि औद्योगिक इकाइयों को भी किसी तरह की दिक्कत नहीं आएगी। साथ ही सरकार तय समय से पहले प्रोजेक्ट पूरे कर सकेगी।

जींद में सबसे बड़ा प्रोजेक्ट प्रस्तावित

इससे पहले भी सीएम प्रदेश में नई 10 आइएमटी बनाने की घोषणा कर चुके हैं। जिनमें से कई जगह काम शुरू हो चुका है। 10 आइएमटी में हिसार (एयरपोर्ट के पास), सोहना, नारनौल, रोहतक (EV पार्क), सिरसा, पलवल, अंबाला, नारायणगढ़, जींद और रेवाड़ी शामिल हैं। इनमें सबसे बड़ा प्रोजेक्ट जींद में प्रस्तावित है, जो करीब 12 हजार एकड़ में दिल्ली-कटरा और 152 डी
एक्सप्रेसवे के पास विकसित होगा।

मनमाने रेट के चलते सरकार ने निकाला बीच का रिश्ता


ई-भूमि पोर्टल पर कसानों द्वारा जमीन के मनमाने रेट मांगे जा रहे हैं और कई जगह विवाद की स्थिति बन रही है तो ऐसे में सरकार ने लैंड पूलिंग पालिसी में किसानों को सीधे भागीदार बनाकर बीच का रास्ता निकाला है। हरियाणा सरकार ने नारायणगढ़ में करीब 1.5 करोड़ रुपये प्रति एकड़ का रेट तय किया है। इसके साथ उन्हें टाउनशिप में 50 प्रतिशत का भागीदार बना दिया है।

ऐसे मिलेगा किसानों को लाभ

उदाहरण के तौर पर हम इसे ऐसे समझ सकते हैं। यदि किसी किसान के पास 1 एकड़ जमीन है, तो उसमें से कुछ हिस्सा इंफ्रास्ट्रक्चर में जाएगा। बची जमीन में से करीब 50% हिस्सा किसान को विकसित प्लॉट के रूप में मिलेगा। यानी किसान को लगभग 1200–1250 वर्ग मीटर का तैयार प्लॉट मिलेगा, जिसकी कीमत भविष्य में ज्यादा हो सकती है।

किसान कर सकेंगे चुनाव

नई पॉलिसी में किसानों को पूरी तरह से छूट दि गई है। वे चाहें तो सीधे मुआवजा ले सकते हैं या विकसित प्लॉट का विकल्प चुन सकते हैं। प्लॉट को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटने या एक साथ रखने की भी छूट होगी। इस पॉलिसी पर उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह
का कहना है कि अंबाला और नारायणगढ़ में जमीन उपलब्ध हो चुकी है और बाकी जगहों के लिए लैंड पूलिंग स्कीम को अंतिम रूप दिया जा रहा है।सरकार का मानना है कि इस मॉडल से किसानों को बेहतर फायदा मिलेगा।

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