8th Pay Commission : भले ही 1 जनवरी 2026 से नया पे कमीशन प्रभावी हो गया है, लेकिन कर्मियों के बीच 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की घोषणा का बेसब्री से इंतजार है। अब इसी बीच एक बड़ा अपडेट सामने आया है। जानकारी के अनुसार कर्मियों को जल्द ही 18 महीने का एरियर मिल सकता है। खबर में जानिए इस बारे में विस्तार से-
कब हुआ था नए पे कमीशन का गठन
सुत्रों के अनुसार अगर प्रोसेस तय समय पर पूरा होता है तो कर्मियों की नई सैलरी जुलाई 2027 से लागू हो सकती है। इसके साथ ही कर्मचारियों को 18 महीने का एरियर (18 months arrear) भी मिल सकता है। जनवरी 2025 में कैबिनेट ने आठवें वेतन आयोग का गठन किया थी, लेकिन अब तक इसे औपचारिक रूप से लागू नहीं किया है। अभी तक नए पे कमीशन के (Terms of Reference ) अप्रूव नहीं हुआ है। यही ToR आयोग के काम का स्ट्रक्चर तय करेगा। सरकार की ओर से जनवरी में (NC-JCM) से इनपुट मांगे थे, जिसने अपनी सिफारिशें जनवरी में भेज दी थीं।
जल्द मिलेगी ToR को मंजूरी
संगठन के महासचिव को उम्मीद है कि जल्द ही ToR (Terms of Reference ) को मंजूरी दी जाएगी। माना जा रहा है कि दीवाली से पहले इस पर सरकार घोषणा कर सकती है, हालांकि अभी तक सरकार ने कोई ऐलान नहीं किया है। पिछले वेतन आयोग के पैटर्न को देखें तो किसी भी वेतन आयोग को रिपोर्ट तैयार करने में 18 से 24 महीने का वक्त लग सकता है।
कब तक तैयार होगी नए पे कमीशन की रिपोर्ट
जैसे ही नए पे कमीशन की रिपोर्ट (New Pay Commission Report) तैयार होती है तो उसके बाद सरकार 3 से 9 महीने समीक्षा करती है। 7वां वेतन आयोग फरवरी 2014 में बनाया था और नवंबर 2015 में रिपोर्ट को सौंप दिया गया था। इस हिसाब से 8वां आयोग 2025 में गठित होने के बाद भी नया पे कमीशन अप्रैल 2027 से पहले रिपोर्ट नहीं दे पाएगा। हालांकि, इस बार प्रोसेस में तेजी आ सकती है और रिपोर्ट 2026 के आखिर या 2027 की शुरुआत तक आ सकती है।
कब मिलेगा कर्मियों को 18 महीने का एरियर
NC-JCM के अधिकारियों के अनुसार, आठवां वेतन आयोग (8th cpc updates) जब भी लागू हो, इसका प्रभाव 1 जनवरी 2026 से ही माना जाएगा। यानी अगर रिपोर्ट जुलाई 2027 में लागू होती है, तो भी कर्मचारियों को 18 महीने का एरियर मिलने की संभावना है। अगर ऐसा होता है तो कर्मियों को 18 महीने का एरियर + जुलाई 2027 से सैलरी (Employees Salary Hike) बढ़ोतर मिल सकती है, जिससे कर्मियों को महंगाई में वित्तीय राहत मिलेगह।