Haryana News : लाल डोरा के मालिकाना हक की सुनवाई पंचायत नहीं करेगी, पंचायत विभाग के डायरेक्टर ने दिए निर्दश

Haryana News : पंचायत विभाग के डायरक्टेर ने डोरा आबादी संपति के मालिकाना हक को लेकर निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि संपति के मालिकाना हक के विवादों की सुनवाई अब पंचायत विभाग नहीं करेगा। आइए खबर में जानते हैं पूरा मामला

पंचायत विभाग नहीं करेगा सुनवाई


जिला फरीदाबाद के बल्लभगढ़ इलाके के गांवों में लाल डोरा के भीतर आने वाली जमीन के मालिकाना हक को लेकर काफी समय से विवाद चल रहा था। इस चल रहे पारिवारिक विवादों पर पंचायत विभाग के निदेशक ने साफ-साफ कहा ऐसे सभी मामलों की सुनवाई अब राजस्व विभाग करेगा।

जानिए लाल डोरा के बारे में


ग्रामीण इलाकों में फिक्स नंबर के अंदर आने वाली आबादी को लाल डोरा कहा जाता था। जहां ये आबादी रहती थी उसका हक और आधिकारिक रिकॉर्ड पंचायत या राजस्व विभाग के पास नहीं होता था।यदि कोई व्यक्ति मकान खरीदता भी था तो केवल इकरारनामा किया जाता था।

सरकार ने मालिकाना हक देने की प्रक्रिया शुरू की


सरकार ने लाल डोरा क्षेत्र के मकानों को स्वामित्व योजना के तहत मालिकाना हक देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसका मतलब यह हुआ कि अब जो मकान किसी परिवार के किसी सदस्य के नाम होगा, वह वैध मालिक माना जाएगा। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी मकान में तीन भाई रहते हैं तो तीनों को बराबर का मालिक माना गया है।

170 रुपये में रजिस्ट्री


पंचायत विभाग ने इस प्रक्रिया में 170 रुपये प्रति संपत्ति लेकर तहसील में रजिस्ट्री भी करवाई है। इससे पहले लाल डोरा के मकानों या प्लॉट की कोई वैध रजिस्ट्री नहीं होती थी। अगर कोई मकान खरीदता था, तो सिर्फ इकरारनामा ही बनता था।

ये विवाद आए सामने


कुछ मामलों में बड़े भाई ने अपने नाम से रजिस्ट्री करा ली और छोटे भाइयों को शामिल नहीं किया। अब छोटे भाइयों ने अपने हक की शिकायत पंचायत विभाग के अधिकारियों के पास दर्ज कराई। पहले ये मामले जिला पंचायत और खंड विकास अधिकारी यानी बीडीपीओ देख रहे थे।लेकिन अब पंचायत विभाग के निदेशक ने स्पष्ट कर दिया है कि लाल डोरा के मामलों की सुनवाई राजस्व विभाग के अधिकारी करेंगे।

इन मामलों की सुनवाई राजस्व विभाग के अधिकारी करेंगे


बल्लभगढ़ की तहसीलदार भूमिका लांबा का कहना है कि जनवरी 2025 में लाल डोरा को लेकर अधिसूचना जारी हो चुकी है। अब तक जिन विवादों की सुनवाई पंचायत करती थी, वह अब राजस्व विभाग के अधिकारी ही करेंगे।

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