Hisar News : हरियाणा के हिसार शहर को चमकाने के लिए सरकार की तरफ से जोरो शोरो से काम किया जा रहा है, हिसार में पिछले 8 दिन से कचरा नहीं उठाया गया है और सड़कों पर कचरे का ढेर लग गया है। कचरे को लेकर बिगड़ रहे इन हालातो को देखते हुए प्रशासन की तरफ से नया कदम उठाया गया है।
हरियाणा के हिसार जिले (Haryana News) में फिलहाल सड़कों तथा गलियों में कचरे की बदबू (smell of garbage) लोगों को परेशान कर रही है। सड़कों पर फैले कचरे की वजह से शहर के वातावरण पर काफी बुरा असर पड़ रहा है। मीडिया रिपोर्ट में लोगों का कहना है कि शहर की सफाई व्यवस्था (city cleaning system) चरमरा गई है। हिसार शहर में जो लोग थोड़े समय पहले स्वच्छता अभियान में अपना सहयोग दे रहे थे वह अब खुले में सड़कों पर कचरा फेंक रहे हैं। लोगों का कहना है की स्वच्छ हिसार (clean hisar) का स्लोगन अब केवल दीवारों पर ही लिख रह गया क्योंकि शहर की सड़के कचरे से भर गई है।
शहर की सड़कों पर कचरा फैलने की वजह
निगम आयुक्त नीरज (Corporation Commissioner Neeraj) की तरफ से मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि हिसार शहर से गंदगी को हटाने के लिए पुलिस की मदद भी ली जा सकती है। हिसार शहर में तकरीबन 1470 टन कचरा सड़ रहा है।
हिसार शहर की सड़कों पर गंदगी (Dirt on the streets of Hisar city) फैलने की वजह सिर्फ यही है कि नगरपालिका कर्मचारी संघ हरियाणा की हिसार इकाई की हड़ताल चल रही है। कर्मचारियों की तरफ से नगर निगम के मुख्य गेट पर ताला लगा दिया गया है और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने के साथ-साथ हड़ताल शुरू कर रखी है और आज आठवां दिन है कि शहर की सड़कों से कचरा नहीं उठा है।
इस हड़ताल की वजह से शहर के फील्ड ऑफिस और डोर टू डोर कचरा उठाने का काम पूरी तरह बंद हो गया है। शहर की गलियों और मुख्य सड़कों पर जगह-जगह कूड़े के ढेर इकट्ठा हो गए हैं। सड़कों पर बिखरा कचरा (garbage scattered on the streets) और उसमें से आने वाली दुर्गंध ने आम आदमी के नाक में दम कर दिया है।
बिगड़ रहे हालात
आजाद नगर व्यापार मंडल (Azad Nagar Trade Board) के प्रधान मांगेराम की तरफ से मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि हिसार के आजाद नगर में चारों तरफ कचरा फैला हुआ है और अगर जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया जाएगा तो हालात और खराब होते जा रहे हैं। मिली जानकारी के मुताबिक पता चला है कि 1100 कर्मचारी पूरी तरह हड़ताल पर है और डोर टू डोर कचरा उठाने वाले कर्मचारी भी धरने पर बैठे हुए हैं। ठेकेदार की तरफ से कर्मचारियों की शर्तों को पूरा नहीं किया जा रहा और कर्मचारियों को पूरा वेतन (employees salary) नहीं मिल रहा है।