Hisar News : नगर निगम का डेयरी प्लाजा प्रोजेक्ट चार बार टेंडर लगाने के बावजूद भी सिरे नहीं चढ़ पाया है। सीवरेज पेटल सड़क और स्ट्रीट लाइट बनाने के लिए कोई भी एजेंसी शर्तें पूरी नहीं कर पाई है। अब खबर में जानिए निगम ने क्या फैसला लिया है खबर में विस्तार से ।
अब अलग-अलग लगाए जाएंगे टेंडर
नगर निगम का डेयरी प्लाजा प्रोजेक्ट चार बार टेंडर लगाने के बावजूद भी सिरे नहीं चढ़ पाया है। सीवरेज पेटल सड़क और स्ट्रीट लाइट बनाने के लिए कोई भी एजेंसी शर्तें पूरी नहीं कर पाई है। अब नगर निगम ने फैसला लिया है कि सड़क सीवरेज पेयजल और स्ट्रीट लाइट लगवाने के कार्य को लेकर अलग-अलग एजेंसियों को टेंडर दिए जाएंगे। पहले एक ही एजेंसी को टेंडर दिए जा रहे थे जो शर्तें पूरी नहीं कर सकी। शहर में 396 पशु डायरी को
यहां शिफ्ट करने के लिए 41.08 करोड रुपए की लागत से डेरी प्लाजा प्रोजेक्ट को विकसित करना है। नगर निगम के अधिकारियों की तरफ से तीन टुकड़ों में करवाए जाने वाले कार्य को लेकर मुख्यालय से अनुमति मांगी है। मुख्यालय से अनुमति मिलने के बाद कार्यों को लेकर टेंडर लगाए जाएंगे
तीन स्तर पर कार्य किया जाएगा पूरा
निगम ने हेड क्वार्टर से कार्य को तीन स्तरो में पूरा करने की
नगर निगम अधिकारियों ने मुख्यालय से टेंडर को तीन टुकड़ों में कर इसे पूरा करने की सहमती मांगी है। शहर में 41.08 करोड़ रुपये की लागत से डेयरी प्लाजा को स्थापित किया जाना है। ताकि शहर में चलने वाली 396 पशु डेयरियों को प्लाजा में शिफ्ट किया जाना है।
साल 2000 में हुई थी डेयरी शिफ्टिंग की घोषणा
इनेलो सरकार में साल 2000 में यानी आज से 25 साल पहले डेयरी शिफ्टिंग की घोषणा हुई थी। इसको शिफ्ट करने के लिए निगम में धांसू रोड पर जमीन भी खरीद ली गई थी। मगर , अफसोस की बात ये है कि इतने साल बाद भी प्रोजेक्ट शुरू नहीं हो पाया। साल 2000 के बाद इसकी शिफ्टिंग की मांग 4-5 साल बाद फिर उठी। 2010 में शहर में सर्वे भी हुआ था, जिसमें 292 डेयरियां शहर में संचालित पाई गई।
2014 में मनोहरलाल ने की थी घोषणा
अगस्त 2013 में निगम अधिकारियों ने बगला रोड पर 137 एकड़ 7 कनाल 14 मरले जमीन चिह्नित कर सरकार को प्रस्ताव भेजा था, लेकिन प्रोजेक्ट आज तक सिरे नहीं चढ़ पाया। 9 दिसंबर 2014 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने डेयरी शिफ्टिंग की घोषणा करते हुए शहर के चारों ओर 25-25 एकड़ जमीन पर डेयरियां बसाने की बात कही थी। जमीन उपलब्ध न होने पर बगला रोड पर करीब 50 एकड़ जमीन चिह्नित की गई।
2023 में रद्द हुई बोली
नगर निगम ने पहले इस जमीन पर डेयरी प्लाजा का प्रारूप तैयार कर कुछ प्लॉटों की बोली भी कर दी थी, लेकिन मुख्यालय की आपत्तियों के चलते 2023 में इसे रद्द करना पड़ा। कारण बताया गया कि प्रोजेक्ट डिजाइन बिल्डिंग कोड के अनुरूप नहीं था। इसके बाद नई प्रक्रिया शुरू कर प्रशासनिक मंजूरी ली गई, लेकिन 2024 में चुनावों के कारण काम आगे नहीं बढ़ सका। 2025 में चार बार टेंडर जारी किए गए, फिर भी कोई एजेंसी सामने नहीं आई।
अब अलग-अलग एजेंसियो को दिया जाएगा टेंडर
निगम आयुक्त नीरज कुमार के अनुसार, एक ही एजेंसी के पास पेयजल-सीवरेज, सड़क और लाइट तीनों क्षेत्रों का अनुभव न होने से टेंडर नहीं मिल पाए। अब प्रोजेक्ट को तीन भागों में बांटकर अलग-अलग एजेंसियों से काम करवाने की योजना है, जिसके लिए मुख्यालय से अनुमति मांगी गई है।
342 प्लॉट बनाए जाएंगे
प्रोजेक्ट के तहत 50 एकड़ क्षेत्र में कुल 342 प्लॉट बनाए जाएंगे। इनमें 250 गज के 239 प्लॉट,350 गज के 68 प्लॉट,
500 गज के 27 प्लॉट, 1000 गज के 8 प्लॉट होंगे। इसके अलावा मिल्क चिलिंग प्लांट, गोबर गैस प्लांट और वाटर वर्क्स की भी व्यवस्था होगी।
सीवर जाम होने की समस्या से मिलेगी राहत
डेयरियों के शहर से बाहर शिफ्ट होने पर सीवर जाम की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। क्योंकि कई डेयरी संचालक गोबर सीधे सीवर में डाल देते हैं, जिससे जाम की समस्या बनी रहती है। निगम ने अस्थायी समाधान के तौर पर ट्रॉलियों के जरिए गोबर उठवाने की व्यवस्था शुरू की है।