Pay commission : वेतन आयोग के जरिए कैसे बढ़ती है सैलरी, जानिए 55 रूपये से 18 हजार तक की सैलरी का सफर

Pay commission : कर्मचारियों की सैलरी का संतुलन बनाए रखने के लिए हर 10 साल में एक नया वेतन आयोग लागू कर दिया जाता है और कर्मचारियों को वेतन आयोग की सिफारिश के आधार पर ही सैलरी दी जाती है। फिलहाल कर्मचारियों को 7th पे कमीशन के हिसाब से वेतन मिल रहा है। आइए जानते हैं वेतन आयोग के जरिए कैसे बढ़ती है सैलरी और कर्मचारियों की 55 रूपये की सैलरी से 18000 तक की सैलरी तक क्या रहा सफर।


देशभर के सरकारी कर्मचारियों को उन दिनों सातवें वेतन आयोग (7th Pay commission) के तहत सैलरी मिल रही है। इन दिनों कर्मचारी आठवें वेतन आयोग (8th Pay commission) का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। आठवें वीं वेतन आयोग को लागू करने को लेकर लगातार बैठक हो रही है। नए वेतन आयोग को हर 10 साल में लागू कर दिया जाता है। सातवें वेतन आयोग का कार्यकाल (Tenure of the Seventh Pay Commission) 2026 में खत्म हो चुका है लेकिन अभी तक आठवां वेतन आयोग लागू नहीं हुआ है और कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग के तहत ही सैलरी (salary to employees) मिल रही है। आइए को बताते हैं सातवें वेतन आयोग की शुरुआत कैसे हुई और किस तरह पे कमिशन में बदलाव किया गया।


देश आजाद होने से अब तक टोटल सात वेतन आयोग बनाए जा चुके हैं। पहले वेतन आयोग की शुरुआत में 1946 में हुई थी जबकि सातवें वेतन आयोग को 2014-15 में लागू किया गया।


अब तक के वेतन आयोग से सैलरी में बढ़ोतरी


पहले से सातवें वेतन आयोग तक केंद्रीय कर्मचारियों के न्यूनतम और अधिकतम वेतन (Salary hike due to Pay Commission) में लगातार बढ़ोतरी हुई। पहले वेतन आयोग में न्यूनतम वेतन 55 रुपये और अधिकतम वेतन 2000 रुपये था। दूसरे वेतन आयोग में यह बढ़कर 80 रुपये और 3000 रुपये हो गया। 3rd वेतन आयोग में न्यूनतम वेतन 196 रुपये तथा अधिकतम वेतन 3500 रुपये तय किया गया। 4th वेतन आयोग में यह 750 रुपये और 8000 रुपये हो गया। 5th वेतन आयोग में न्यूनतम वेतन 2550 रुपये और अधिकतम वेतन 26000 रुपये निर्धारित किया गया। 6th वेतन आयोग में यह बढ़कर 7000 रुपये और 80000 रुपये हो गया। सातवें वेतन आयोग में न्यूनतम वेतन 18000 रुपये तथा अधिकतम वेतन 225000 रुपये तय किया गया। इससे क्लीयर होता है कि हर वेतन आयोग में कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि (Salary hike) की गई।


वेतन आयोग का शुरुआती ढांचा


पहले वेतन आयोग से लेकर 7th पे कमीशन तक सैलेरी स्ट्रक्चर (New Pay Commission) में कई तरह के बदलाव किए गए और इन बदलाव का उद्देश्य केवल कर्मचारियों की सैलरी और सुविधाओं को बेहतरीन बनाना है। पहले वेतन आयोग के समय सैलरी का ढांचा काफी आसान था इसमें बेसिक सैलरी के साथ केवल कुछ ही भत्ते शामिल होते थे लेकिन अब बढ़ती महंगाई पर काबू पाने के लिए वेतन आयोग की तरफ से भी कर्मचारियों की सैलरी में संशोधन (salaries of employees) किया गया है।


3rd और 4th वेतन आयोग के दौरान DA में बढ़ोतरी और काफी ज्यादा गौर किया गया ताकि कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति पर महंगाई का कोई असर न पड़े। 5th पे कमीशन में कई नए भत्तों को भी शामिल किया गया। 6th पे कमीशन में सैलेरी कैलकुलेशन को पारदर्शी बनाने के लिए पे बैंड और ग्रेड पे को भी लागू किया गया।


सातवें वेतन आयोग में भी सैलेरी स्ट्रक्चर (Salary structure in the 7th Pay Commission) और इस पूरे सिस्टम को आसान बनाने के लिए पे मैट्रिक्स लागू किया गया जिसमें अलग-अलग लेवल बनाए गए ताकि कर्मचारियों के प्रमोशन और वेतन वृद्धि को समझने में कोई उलझने हो। बेसिक सैलरी में फिटमेंट फैक्टर (fitment factor) के जरिए बढ़ोतरी की गई और अंदाजा लगाया जा रहा है कि जल्द ही आठवां वेतन आयोग लागू होने वाला है और आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के तहत कर्मचारियों की सैलरी में काफी ज्यादा इजाफा देखने को मिलेगा।

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